


रोसड़ा प्रखंड क्षेत्र में पिछले कई दिनों से लगातार शीतलहर का असर बना हुआ है। गिरते तापमान और ठंडी हवाओं ने जहां रबी फसलों पर मिला-जुला प्रभाव डाला है, वहीं किसान बदलते मौसम को लेकर सतर्क और चिंतित नजर आ रहे हैं। किसानों के अनुसार, मौजूदा ठंड गेहूं की फसल के लिए काफी अनुकूल साबित हो रही है। शीतलहर के कारण गेहूं की पौधों में कल्ले निकलने की प्रक्रिया बेहतर हुई है

जिससे उत्पादन बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए गेहूं उत्पादक किसान इस समय खेतों में खरपतवार नियंत्रक दवाओं का छिड़काव कर रहे हैं, ताकि फसल को पोषक तत्वों की पूरी आपूर्ति मिल सके और पैदावार अच्छी हो।वहीं दूसरी ओर, लगातार ठंड, कोहरा और खेतों में बढ़ी नमी आलू की फसल के लिए घातक साबित हो रही है। प्रखंड के कई गांवों में आलू की फसल पर झुलसा रोग का प्रकोप तेजी से फैल रहा है। इस रोग के कारण आलू के पौधों की पत्तियां झुलस रही हैं और धीरे-धीरे पूरी फसल प्रभावित हो रही है।

इससे किसानों को भारी नुकसान का अंदेशा है।आलू उत्पादक किसानों का कहना है कि उन्होंने बीज, खाद और सिंचाई पर काफी खर्च किया है, लेकिन मौसम की मार से उनकी मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है। कई किसानों ने फसल बचाने के लिए दवाओं का छिड़काव शुरू कर दिया है, लेकिन लगातार ठंड और नमी के कारण रोग पर नियंत्रण पाना मुश्किल हो रहा है।किसानों ने कृषि विभाग से सलाह और सहयोग की मांग की है, ताकि झुलसा रोग से बचाव के लिए सही मार्गदर्शन मिल सके।



विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर दवा का छिड़काव और खेत में हल्की सिंचाई से नुकसान को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।मौसम का यह बदला मिजाज एक बार फिर किसानों के लिए चुनौती बनकर सामने आया है। अब सभी की नजरें आने वाले दिनों के मौसम पर टिकी हैं, जिससे तय होगा कि रबी फसलों का भविष्य कैसा रहेगा।




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