


रोसड़ा नगर परिषद स्थित बाबा खास दुल्ले रहमतुल्लाह अलैह की दरगाह परिसर में आयोजित तीन दिवसीय उर्स मेला बुधवार को श्रद्धा और उत्साह के माहौल में सम्पन्न हो गया। उर्स को लेकर पूरे इलाके में रौनक बनी रही।
दरगाह परिसर एवं आसपास के क्षेत्रों में खाने-पीने की दुकानें, खिलौने, कपड़े, टोपी, चादर, श्रृंगार प्रसाधन और मीना बाजार सहित कई अस्थायी दुकानें सजाई गई थीं। बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले और खेल-तमाशे की भी व्यवस्था की गई थी।

उर्स मेला के दौरान बाबा खास की मजार पर चादरपोशी और मन्नत मांगने के लिए अकीदतमंदों की भारी भीड़ उमड़ी। समस्तीपुर जिले के अलावा दरभंगा, बेगूसराय, खगड़िया, वैशाली, सहरसा सहित आसपास के जिलों और भारत के राज्यों से हजारों श्रद्धालु पहुंचे और अमन-चैन की दुआ मांगी।मेले को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन की ओर से दंडाधिकारी के साथ पुलिस बल की तैनाती की गई थी। सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरों से लगातार निगरानी की जा रही थी।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बाबा खास दुल्ले रहमतुल्लाह अलैह, अजमेर शरीफ के महान सूफी संत हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती गरीब नवाज के खादिम थे।

उनके जीवन और योगदान का उल्लेख ऐतिहासिक ग्रंथों जैसे आईन-ए-अकबरी और तारीख-ए-तारीफ में भी मिलता है। बताया जाता है कि लगभग 400 वर्ष पूर्व वे धार्मिक प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से इस क्षेत्र में आए थे।लोक मान्यता है कि बाबा खास अपनी इल्म-ए-शिफा के कारण मृत अवस्था से पुनः जीवित हो गए थे, जिससे उनकी ख्याति दूर-दूर तक फैल गई।



उर्स मेला हर वर्ष धार्मिक सौहार्द, भाईचारे और आस्था का प्रतीक बनकर लोगों को एक सूत्र में बांधता है। उर्स मेला को लेकर यहां सभी समुदाय के लोग पहुंचते हैं। बाबा खास के दरगाह पर मांगी गई सभी मुरादे पूरी होती है। जिसको लेकर प्रत्येक वर्ष यहां अकीदतमंद की संख्या बढ़ती जा रही है।




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