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सिंघिया में ‘आवास’ के नाम पर लूट; बकरी बेचकर सचिव को दी रिश्वत, फिर भी सूची से नाम गायब।

सिंघिया (समस्तीपुर): “साहब, सिर पर छत की उम्मीद में हमने अपनी बकरी बेचकर पैसा दिया, पर आज न पैसा बचा और न ही घर की उम्मीद।” यह शब्द सिंघिया प्रखंड मुख्यालय में धरना दे रहे उन गरीब दलित-महादलित परिवारों के हैं, जिनका गुस्सा अब सड़क पर फूट पड़ा है।
​रिश्वतखोरी का संगीन आरोप।

वारी पंचायत के दर्जनों ग्रामीणों ने पंचायत सचिव उपेंद्र यादव पर सीधा और गंभीर आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि आवास योजना की सूची में नाम जोड़ने के एवज में उनसे 1000 से 1500 रुपये तक वसूले गए। कुछ लाचार परिवारों ने इस उम्मीद में अपनी बकरियां तक बेच दीं कि उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिलेगा, लेकिन नई सूची आने पर पता चला कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई।

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अमीरों को ‘महल’, गरीबों को सिर्फ आश्वासन
​धरनार्थियों ने आवास सहायक की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि जिनके पास पहले से पक्का मकान, ट्रैक्टर और पर्याप्त जमीन है, उन्हें आवास योजना का लाभुक बना दिया गया, जबकि असल हकदार महादलित परिवार आज भी तिरपाल और झोपड़ियों में रहने को मजबूर हैं।

अधिकारी मौन, जनता परेशान
​जब इस भ्रष्टाचार के बारे में पंचायत सचिव से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने पक्ष रखने के बजाय फोन काट दिया। वहीं, प्रखंड मुख्यालय परिसर में पिछले दो दिनों से चल रहे इस धरने के बावजूद अब तक किसी बड़े अधिकारी ने ग्रामीणों को ठोस आश्वासन नहीं दिया है।

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