रोसड़ा। बिहार में पूर्ण शराबबंदी के दावों के बीच रोसड़ा थाना क्षेत्र में पुलिस की हालिया कार्रवाई ने एक बार फिर प्रशासन की सक्रियता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस भले ही इसे अपनी ‘बड़ी उपलब्धि’ बता रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि पुलिस केवल प्यादों को पकड़कर अपनी पीठ थपथपा रही है, जबकि शराब के बड़े सिंडिकेट और मुख्य माफिया आज भी खुलेआम कानून को चुनौती दे रहे हैं।
कहाँ हुई कार्रवाई?
हाल ही में पुलिस ने थाना क्षेत्र के दो गांवों में छापेमारी की:
गोठरा गांव: यहाँ से पुलिस ने 22 बोतल अंग्रेजी शराब बरामद की और लक्ष्मण महतो नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया।
महुली गांव: यहाँ से पुलिस को 15.75 लीटर विदेशी शराब मिली।
प्रशासन की कार्यशैली पर उठते गंभीर सवाल
स्थानीय लोगों और जानकार सूत्रों का मानना है कि पुलिस की यह कार्रवाई केवल आंकड़ों का खेल है। विरोध के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
माफिया सुरक्षित, ‘लक्ष्मण’ जैसे मोहरे गिरफ्तार: पुलिस ने गोठरा से एक व्यक्ति को तो दबोच लिया, लेकिन सवाल यह है कि शराब की ये खेप पहुँचानी वाली बड़ी मछलियाँ कौन हैं? आखिर क्यों हर बार केवल छोटे विक्रेता ही पकड़े जाते हैं और मुख्य सप्लायर पुलिस की पहुँच से बाहर रहते हैं?
महुली में ‘खाली हाथ’ पुलिस: महुली गांव में 15 लीटर से अधिक शराब तो मिल गई, लेकिन पुलिस वहां किसी को गिरफ्तार नहीं कर सकी। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस की सूचना पहले ही लीक हो जाती है, जिससे मुख्य कारोबारी फरार होने में सफल रहते हैं।
सिर्फ सूचना पर निर्भरता: थानाध्यक्ष लालबाबू कुमार का कहना है कि कार्रवाई ‘गुप्त सूचना’ के आधार पर हुई। सवाल यह उठता है कि क्या पुलिस का अपना खुफिया तंत्र इतना कमजोर है कि जब तक कोई सूचना न दे, तब तक अवैध कारोबार फलता-फूलता रहता है?
क्षेत्र में शराब की होम डिलीवरी और खुलेआम बिक्री की खबरें आम हैं। लोगों का कहना है कि पुलिस की यह छिटपुट छापेमारी केवल दिखावा है। जब तक थाना स्तर पर जवाबदेही तय नहीं होगी और बड़े तस्करों के खिलाफ सख्त एक्शन नहीं होगा, तब तक ऐसी ‘बरामदगी’ महज एक औपचारिकता बनी रहेगी।
