समस्तीपुर रोसड़ा :- अग्निकांड जैसी घटनाओं से बचाव एवं आम लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से 14 से 20 अप्रैल तक मनाए जा रहे अग्निशमन सेवा सप्ताह के तहत अनुमंडल अग्निशमालय रोसड़ा द्वारा व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में अनुमंडलीय अस्पताल रोसड़ा में विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत अस्पताल के डॉक्टरों एवं नर्सिंग स्टाफ को बैच एवं पिन फ्लैग लगाकर की गई। इस अवसर पर अग्निशमन विभाग की टीम ने अस्पताल परिसर में मॉक ड्रिल का आयोजन किया, ताकि आपात स्थिति में त्वरित और सही प्रतिक्रिया देने का अभ्यास कराया जा सके।
अग्निशमन कर्मियों द्वारा फायर ऑडिट भी किया गया, जिसमें अस्पताल के विभिन्न हिस्सों का निरीक्षण कर संभावित खतरों की पहचान की गई। इस दौरान सामान्य आग, रसोई से लगने वाली आग, बिजली के शॉर्ट सर्किट, तथा बीड़ी-सिगरेट जैसी लापरवाही से होने वाली आग के कारणों और उनसे बचाव के उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।विशेष रूप से अस्पताल में लगे अग्निशमन यंत्रों की जांच की गई। कर्मियों ने बताया कि इन यंत्रों का सही उपयोग, नियमित रख-रखाव और समय-समय पर उनकी सक्रियता की जांच बेहद जरूरी है, ताकि आपात स्थिति में वे प्रभावी ढंग से काम कर सकें।
साथ ही विद्युत तारों की गुणवत्ता और उन पर पड़ने वाले लोड की भी जांच की गई, जिससे शॉर्ट सर्किट जैसी घटनाओं को रोका जा सके।कार्यक्रम के दौरान लोगों के बीच पम्पलेट का वितरण किया गया, जिसमें अग्निकांड की स्थिति में उठाए जाने वाले आवश्यक कदमों की जानकारी दी गई। साथ ही यह भी बताया गया कि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत डायल 101 या 112 पर संपर्क करें।अग्निशमन पदाधिकारी ओंकार नाथ सिंह ने बताया कि अग्निशमन सेवा सप्ताह के दौरान क्षेत्र के विभिन्न सरकारी एवं निजी संस्थानों, बाजारों और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि “अग्निकांड से बचाव के लिए जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है। यदि लोग सतर्क रहें और सुरक्षा नियमों का पालन करें, तो अधिकांश घटनाओं को रोका जा सकता है।उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि वे बिजली के उपकरणों का सावधानीपूर्वक उपयोग करें, खुले में आग न जलाएं, ज्वलनशील पदार्थों को सुरक्षित रखें तथा धूम्रपान करते समय विशेष सतर्कता बरतें।अग्निशमन सेवा सप्ताह के इस अभियान का मुख्य उद्देश्य लोगों में जागरूकता बढ़ाना और उन्हें आपदा के समय सही कदम उठाने के लिए तैयार करना है, ताकि जान-माल की हानि को न्यूनतम किया जा सके।
