विनय कुमार की रिपोर्ट
बिहार में जमीन रजिस्ट्री की प्रक्रिया को डिजिटल बनाने के उद्देश्य से 17 अगस्त से राज्यभर में पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था लागू कर दी गई है। नई व्यवस्था के तहत क्रेता और विक्रेता की पहचान ओटीपी के माध्यम से सत्यापित की जाएगी तथा रजिस्ट्री पूरी होने के बाद दस्तावेज का डिजिटल स्वरूप उपलब्ध कराया जाएगा। हालांकि, नई व्यवस्था को लेकर रोसड़ा में कातिबों की आपत्तियों के कारण रजिस्ट्री का काम प्रभावित हो रहा है। कातिबों ने काम का बहिष्कार करते हुए अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है।
रोसड़ा में कातिब संघ की ओर से प्रदर्शन कर नई व्यवस्था के प्रति अपनी आपत्तियां दर्ज कराई गईं। संघ का कहना है कि वह डिजिटल और पेपरलेस व्यवस्था का विरोध नहीं कर रहा है, लेकिन नई प्रक्रिया से जुड़े कुछ व्यावहारिक और पेशागत मुद्दों को लेकर सरकार से आवश्यक मांगें पूरी करने की अपेक्षा है। इन मांगों को लेकर कातिब संघ आंदोलन कर रहा है।
कातिबों के कार्य बहिष्कार का सीधा असर रोसड़ा निबंधन कार्यालय के कामकाज पर पड़ा है। रजिस्ट्री कार्य प्रभावित होने से विभाग के राजस्व पर भी असर पड़ने की बात सामने आ रही है। कातिबों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार की ओर से सकारात्मक पहल नहीं की जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
प्रदर्शन और बैठक में सदाशिव शरण प्रसाद, शंभू, रामचंद्र झा, अंजनी कुमार, सुशील, अशफाक अहमद खां, सूर्यदेव सिंह, राजकिशोर पोद्दार, सुबोध लाल, अब्दुल, गोपी रमन लाल, शशि लाल, नरेश साह एवं शरण कुमार मंडल समेत जिला कमेटी के सदस्य उपस्थित रहे। बिहार दस्तावेज महासंघ के सह महामंत्री सुरेश कुमार सिन्हा भी बैठक में मौजूद रहे।
कातिब संघ के प्रतिनिधियों ने कहा कि पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था पारदर्शिता और डिजिटल सुविधा की दिशा में कदम है, लेकिन इसे लागू करने से पहले कातिबों की समस्याओं और उनकी मांगों पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए। संघ ने मांगों के समाधान के लिए सरकार से शीघ्र वार्ता की अपील की है। मांगों के समर्थन में अनिश्चितकालीन आंदोलन जारी रखने की घोषणा की गई है।
