विनय कुमार की रिपोर्ट
प्रखंड अंतर्गत भिरहा गांव स्थित बाबू साहब मंदिर परिसर में आयोजित नौ दिवसीय शिव महापुराण कथा के आठवें दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथावाचक पंडित रतिकांत झा ने शिव महापुराण की विभिन्न कथाओं की व्याख्या करते हुए भगवान शिव की महिमा और श्रीगणेश की पूजा के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।उन्होंने कहा कि शिव पुराण का श्रवण करने से मनुष्य को आध्यात्मिक शांति मिलती है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार शिव पुराण के श्रवण से भूत-प्रेत बाधा और नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव दूर होता है तथा वातावरण सकारात्मक बनता है।कथा के दौरान पंडित रतिकांत झा ने देवासुर संग्राम का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश से वरदान प्राप्त करने के बाद असुरों ने अत्याचार शुरू कर दिया था। देवताओं ने भगवान शिव से असुरों के विनाश की प्रार्थना की। भगवान शिव युद्ध के लिए निकले और ब्रह्मा जी उनका रथ चला रहे थे। लंबे समय तक युद्ध चलने के बावजूद असुरों का संहार नहीं हो सका।
इसके बाद देवताओं को ज्ञात हुआ कि युद्ध से पहले भगवान श्रीगणेश की पूजा नहीं की गई थी। भगवान शिव ने श्रीगणेश का पूजन किया। इसके बाद युद्ध में भगवान शिव ने असुरों का संहार कर देवताओं को विजय दिलाई। उन्होंने श्रद्धालुओं को संदेश दिया कि किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत श्रीगणेश के पूजन से करनी चाहिए।कथावाचक ने रक्षाबंधन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए स्कंद पुराण से जुड़े प्रसंग का वर्णन किया।
उन्होंने बताया कि इंद्र और असुरों के बीच लंबे समय तक युद्ध हुआ, लेकिन इंद्र को विजय नहीं मिल रही थी। तब इंद्राणी ने रक्षाबंधन पूर्णिमा के दिन व्रत रखकर भगवान की पूजा की और इंद्र की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा। इसके बाद इंद्र को युद्ध में विजय प्राप्त हुई और असुरों का विनाश हुआ।पंडित रतिकांत झा ने कहा कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन का त्योहार नहीं है, बल्कि यह रक्षा और मंगलकामना का पर्व है।
इसी परंपरा के तहत आज भी पूर्णिमा के दिन पंडित अपने यजमानों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधते हैं। उन्होंने कहा कि रक्षा सूत्र बांधने की यह परंपरा धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से विशेष महत्व रखती है।कथा के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालु भक्ति में लीन नजर आए। शिव महापुराण के आयोजन से पूरे क्षेत्र का माहौल भक्तिमय बना हुआ है।
