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कलश स्थापना के साथ वासंतिक नवरात्र प्रारंभ। पुरोहित कर  रहे है ऑनलाइन पूजा, भक्तों को घर में रहने की सलाह।

बलवंत कुमार चौधरी (बेगूसराय)
 (बेगूसराय) : वासंतिक नवरात्र पूजन कलशस्थापना के साथ आरंभ हो गया है। लेकिन, अभी देश कोरोना महामारी की चपेट में है। अपना इलाका भी उससे अछूता नहीं रहा है। इस परिस्थिति में पंडित जी भी भक्तों एवं श्रद्धालुओं से निवेदन कर रहे हैं कि अपने अपने घरों में ही कलशस्थापन के बाद विधि विधान से माता की आराधना करें।
 वेदाचार्य पंडित लालन झा कहते हैं कि श्रीदुर्गा सप्तशती के द्वादश अध्याय के आठवें श्लोक में वर्णित उपसर्गानशेषांस्तु महामारी समुद्भवान। तथा त्रिविधमुत्पातं माहात्म्यं शमयेन्मम। अर्थात् देवी स्वयं कहतीं हैं कि मेरा महात्म्य महामारी जनित समस्त उपद्रवों तथा आध्यात्मिक आदि तीनों प्रकार के उत्पात को शांत करने वाला है। इस मंत्र का जाप करें। काल परिस्थिति के अनुसार ही नवरात्र पूजन घर में करना उत्तम होगा। ज्यादा मेलजोल रखने पर महामारी के तीव्र विस्तार की संभावना है। दुर्गा स्थान में भी सिर्फ साधक ही  पूजा पाठ करें। अनावश्यक  भीड़ जमा नहीं करें। पंडित लालन झा ने बताया कि लगभग 10 जगहों पर हम घर बैठे ऑनलाइन के माध्यम से दुर्गा पाठ कर भी रहे हैं और करवा भी रहे हैं। माता की पूजा-अर्चना करने से सभी प्रकार की बाधाओं से मुक्ति मिलेगा।
 पंडित भूवनेश्वर झा कहते हैं कि इस वर्ष वासंतिक नवरात्र देशव्यापी महामारी कोरोना वायरस के साये में हो रहा है। इस स्थिति में हमें माता की पूजा-अर्चना अपने घरों में ही रहकर करनी चाहिए। विधि विधान से कलश स्थापन किया गया है लेकिन, मात्र दो भक्तों की उपस्थिति में। अभी सामाजिक दूरी बनाए रखने की आवश्यकता है। साफ-सफाई के प्रति जागरूक रह कर, अपने घर में नवरात्र पूजन करें। मंदिरों या पूजा स्थल पर सामूहिक उपस्थिति उचित नहीं। जिन देवी स्थानों में वर्षों से वासंतिक नवरात्र पूजन किया जा रहा, वहां सरकार द्वारा जारी निर्देशों का अक्षरश: पालन करना सभी का कर्तव्य है। कहा कि हम सभी के लिए अपने दायित्वों के पालन करने का समय है। समय की मांग है कि स्वहित, देशहित और मानव जाति के हित में सामाजिक दूरी यानी सोशल डिस्टेंस बनाकर हम अपने धार्मिक अनुष्ठान को संपन्न करें।
 पंडित विजयव्रत झा ने बताया कि अभी मंदिर जाने से परहेज करें। घर पर रहकर ही पूजा-पाठ, यज्ञ-हवन करें। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन कोरोना से जंग में निर्णायक सिद्ध होगा। अभी घरों में ही रहें। यह खुद के लिए और समाज के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यज्ञीय पद्धति से कोरोना वायरस के प्रभाव को कम कर सकते हैं। घर पर रहकर कपूर, लौंग, जायफल, जावित्री, काली तिल, गिलोय, नीम पत्ती, गाय घी से हवन करें। नियमित महामृत्युंजय महामंत्र से हवन यज्ञ करने पर रोग प्रतिरोधकता एवं सकारात्मकता की वृद्धि होता है।

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