छौड़ाही में फंसे हैं मध्य प्रदेश के दर्जनों गोलगप्पा बेचने वाले। गर्भवती महिला का नहीं हो रहा इलाज, तीन दिन से हैं सभी भूखे। प्रशासन से लगाई मदद की गुहार।

बलवंत चौधरी (बेगूसराय)
  (बेगूसराय) : कोरोना महामारी से लोगों को बचाने के लिए सरकार ने देश भर में लॉक डाउन कर रखा है। मंझौल अनुमंडल में गांव-गांव घूमकर गोलगप्पा बेचने वाले मध्यप्रदेश राज्य के दर्जनों लोग छौड़ाही में फस गए हैं। तीन दिन से भूखे सभी प्रवासी प्रशासन से भोजन व मदद की गुहार लगा रहे हैं।

मध्य प्रदेश के दतिया जिले के थरैट थाना क्षेत्र के खैरौना गांव निवासी रविन्द्र कुशवाहा, रवि कुशवाहा, आरती कुशवाहा, रवि कुशवाहा, गब्बर कुशवाहा, साधना कुशवाहा, सतेन्द्र कुशवाहा आदि लोग मंझौल अनुमंडल के विभिन्न गांंव में गोलगप्पे की बिक्री घूम घूम कर करते हैं। रोज कमाना रोज खाना होता है। लॉकडाउन के कारण गोलगप्पे का कारोबार बंद हो गया है। आवागमन बंद रहने के कारण सभी लोग अपने अपने किराए के मकान में छौड़ाही बाजार में फसे हुए रहे हैं। इन लोगों ने बताया कि जमा पूंजी लॉकडाउन के शुरुआती 10 दिन में ही खत्म हो गई। यहां के गांव वालों ने हम लोगों की भोजन की व्यवस्था करते रहे।विगत 3 दिन से हम लोग भूखे रह रहे हैं। यहां के प्रशासन से कई बार मदद की गुहार लगा चुके हैं। कोई सुनवाई नहीं हो रही है। गांव वाले भी कितने दिन भोजन कराएंगे लॉक डाउन के कारण वह लोग खुद अभावग्रस्त हैं।
  एक गर्भवती महिला आरती कुशवाहा का कहना था कि चेकअप के लिए पीएचसी गए वहां से भगा दिया गया। कहा गया कि मध्य प्रदेश जाओ वही इलाज होगा। रोते हुए गर्भवती महिला ने बताया कि पैसे नहीं हैं जो कहीं दूसरे जगह इलाज करवा लें। बच्चे सब भूख से बिलबिला रहे हैं । सभी प्रवासी  गरीब  गोलगप्पे वालों एवं उनके परिजनों, बच्चों ने बिहार सरकार एवं मध्य प्रदेश सरकार से भोजन एवं भुखमरी से बचाने की गुहार लगाई है।
 इस संदर्भ में बात करने पर अंचल अधिकारी सुमंत नाथ ने बताया कि आपके द्वारा ही मामले की जानकारी हुई है। पता करवा लेते हैं।

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