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जिले में धड़ल्ले से हो रही है पशु तस्करी, प्रशासन बने मुख दर्शक।

राजकमल कुमार/ बेलदौर/ रिपोर्टर/

बेलदौर प्रखंड क्षेत्र में पशु तस्करों का गिरोह काफी सक्रिय है। मालूम हो कि पशु तस्कर खगड़िया जिला के विभिन्न रास्ते महेशखूंट, चौथम, जीरो माइल ,बेलदौर होते हुए पशु तस्कर बंगाल की ओर जाती है, जो पिकअप गाड़ी नंबर BR11,G,74,29 जो पुलिस की नजरों से चोरी छुपाते हुए चलते हैं। वही पशु तस्कर ने बताया कि हम दो गाड़ी पर छःछः पशुओं को बंगाल की ओर ले जाते हैं। रास्ते में आने वाले थानों को कमीशन बांधा हुआ है। प्रत्येक महीने प्रति रविवार को उनको कमीशन देते हैं। इसलिए हमें तस्करी करने में कभी भी कोई परेशानी नहीं होती है।

पशु तस्कर आंकड़े के लिहाज से मुद्दा काफी गंभीर बना हुआ है,जो  साल के 2014 में एक लाख 9 सौ 99 पशुओं को जप्त किया, वहीं साल  2015 में करीब एक लाख,55 हजार पशुओं को जप्त किया, वही  2016 में एक लाख 68 हजार 801, 2017 में एक लाख 9 हजार 299, 2018 में 63716, 2019 में 30292  पशु जून महीने तक का रिकॉर्ड है, जो बिहार सरकार के सरकारी रिकॉर्ड मुताबिक बताया गया है। पशु तस्कर बांग्लादेश मे पशु तस्करी को एक तरह से अपराध नहीं मानता, पशु व्यापार बांग्लादेश की सरकार के लिए राजस्व का स्त्रोत है। एक पशु तस्कर बांग्लादेश में प्रवेश के बाद  500 रुपिया कस्टम ड्यूटी देता है, और तस्कर से   व्यापार बन जाता है। बांग्लादेश से पशुओं के मांस का निर्यात होता है और यह देश के पशुओं पर आधारित उद्योग बांग्लादेश में चलते हैं। बताया जाता है कि बांग्लादेश में पशुओं की मांग काफी ज्यादा है।
भारत देश में कोई ऐसा कानून नहीं है जिसे एक राज्य से दूसरे राज्य में पशुओं की आवाजाही रोकी जा सके। इसके चलते भारत में कुछ लोग या बांग्लादेश के पशुओं को सीमा तक ले जाते हैं या भारत के लिए एक बेहद संवेदनशील मुद्दा है। वहीं बांग्लादेश के लिए आबादी का अर्थ तंत्र की जरूरत हो सकती है। सिर्फ सीमा पर सख्ती से इस समस्या का निपटारा हो, लेकिन खगड़िया जिला में पशु तस्करों से अछूता नहीं रहा है। जिससे आए दिन पशु अपना पशु खगड़िया जिला होते हुए बंगाल की ओर जाती है। इस पर पुलिस प्रशासन अंकुश लगाने में नाकाम साबित हो रहे हैं।

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