


Santosh raj
पटना/ समस्तीपुर जिले के रोसड़ा प्रखंड अंतर्गत भिरहा गांव की सदियों पुरानी और ऐतिहासिक होली को राजकीय महोत्सव का दर्जा दिलाने की गूंज अब बिहार विधानसभा में सुनाई दी है। रोसड़ा विधायक वीरेंद्र कुमार ने शून्यकाल के दौरान इस महत्वपूर्ण विषय को प्रमुखता से सदन के पटल पर रखा।

वृंदावन की तर्ज पर होली: सामाजिक समरसता की मिसाल
विधायक वीरेंद्र कुमार ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि भिरहा की होली केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और भाईचारे का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यहाँ का होली उत्सव वृंदावन की तर्ज पर आयोजित होता है, जिसमें पारंपरिक रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का अनूठा संगम देखने को मिलता है। इस अवसर पर न केवल स्थानीय बल्कि दूर-दराज के क्षेत्रों से भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक यहाँ पहुँचते हैं।

बुनियादी सुविधाओं और सौंदर्यीकरण पर जोर
विधायक ने सरकार से मांग की कि भिरहा की सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्ण रखने के लिए इसे राजकीय महोत्सव घोषित किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने निम्नलिखित विकास कार्यों की आवश्यकता पर बल दिया:
होली पोखर का सौंदर्यीकरण और परिसर का आधुनिकीकरण।


बेहतर प्रकाश व्यवस्था और साफ-सफाई के प्रबंध।
आगंतुकों के लिए पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विस्तार।
पर्यटन और अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
वीरेंद्र कुमार का तर्क है कि यदि सरकार इस आयोजन को राजकीय संरक्षण प्रदान करती है, तो यह स्थल पर्यटन की दृष्टि से राज्य के मानचित्र पर उभरेगा। इससे न केवल स्थानीय गौरव बढ़ेगा, बल्कि क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि ऐसी महान परंपराओं को संरक्षित करना समय की मांग है ताकि आने वाली पीढ़ी अपनी जड़ों और सांस्कृतिक मूल्यों को समझ सके।


जनता की आवाज: स्थानीय निवासियों के बयान के अनुसार :-
”भिरहा की होली हमारे पूर्वजों की धरोहर है। विधायक जी ने इसे विधानसभा में उठाकर हम ग्रामीणों का मान बढ़ाया है। राजकीय दर्जा मिलने से हमारी परंपरा को विश्व स्तर पर पहचान मिलेगी।”


मुखिया/स्थानीय नागरिक, भिरहा
”यहाँ की होली में जो आनंद और अपनत्व है, वह कहीं और नहीं मिलता। अगर सरकार यहाँ पर्यटन सुविधाओं और पोखर का सौंदर्यीकरण करती है, तो यह इलाका सांस्कृतिक केंद्र बन जाएगा।”

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