

ऐसे लोगों के उत्थान के लिए सरकार कई योजनाएं चला रही जिससे उसके जीवन में बदलाव लाया जा सके अधिकारी व जनप्रतिनिधि भी बेसहारा मंदबुद्धि बेसहारा महिला के लिए अब तक नहीं की कोई पहल। वैसे लोगों की मदद के लिए कई एनजीओ क्षेत्र में लोगों की मदद करने के नाम पर करोड़ों की योजना पर काम कर रहे लेकिन एनजीओ के द्वारा भी गरीब बेसहारा मंदबुद्धि महिला को अब तक नहीं मिला कोई मदद।

प्रशासन के गस्ती गाड़ी भी आते जाते रहते हैं लेकिन मानसिक रूप से बीमार को मदद करने की को जरूरत नहीं समझते हैं।देश कि किसी भी शहर में आप देख ले खास तौर पर रोसड़ा शहर में देखा गया है जिन लोगों को किसी चीज की आवश्यकता नहीं है उन्हें जबरदस्ती पकड़ा कर फोटो खिंचवाने के लिए 10 लोग आगे आ जाते हैं ताकि कल के किसी अखबार में उनकी तस्वीर छापे और तस्वीरों के साथ लिखा हो समाज सेवी ,ऐसे समाज सेवी पर लानत हैं जो समाज सेवी का चोला पहनने का नाटक कर रहे हैं समाज को गुमराह कर रहे हैं।

किसी समाज सेवी ने मानसिक रूप से बीमार मनोबधित महिला को मदद करने के लिए आगे नही आया है नही समाज कल्याण में इसकी सूचना दिया है।

अशक्ता से ग्रस्त व्यक्यिों को विशेषतः मानसिक बीमारी और मनोबधिता जैसे अन्य अवरोधें से जूझने वालों को प्राधिकरण द्वारा व देखरेख नहीं मिल पाती जो कि उन्हें मिलनी चाहिए। उन्हें अलग रखा जाता हैं और उनको केवल समाज कल्याण के पितृ सुलभ नजरिये से देखा जाता है जो उन्हें केवल उन लोगों के रूप में दर्शाता है जिन्हें राज्य एवं समाज द्वारा विशेष सुरक्षा की आवश्यकता है।

अशक्त व्यक्यिों के अधिकार (सी.आर.पी.डी) 2008 के सयुंक्त राष्ट्र करार पर भारत एक हस्ताक्षरी है और तबसे हमारा देश इस करार के अनुसमर्थन में है, यह हमारे विधिक तंत्र के लिए अनिवार्य है कि वह सुनिश्चित करे कि अशक्ताग्रस्त व्यक्यिों (मानसिक रूप से अस्वस्थ एवं मानसिक रूप से अशक्त व्यक्तियों सहित) अपने मानव अधिकारों और मौलिक स्वतंत्रता की सिर्फ बात हो रही।

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