रोसड़ा: वादों के ‘ठंडे बस्ते’ में समाई महावीर चौक-प्रखंड मुख्यालय सड़क, जलजमाव से बने बाढ़ जैसे हालात; जनता पूछ रही- कब जागेगा प्रशासन।

Samastipur :- ​रोसड़ा चुनावी समर में जिन सड़कों को विकास का ‘आइना’ बताकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, चुनाव खत्म होते ही वे वादों के ठंडे बस्ते में दफन हो जाती हैं। कुछ ऐसा ही हाल समस्तीपुर जिला के रोसड़ा नगर परिषद क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण सड़कों में से एक का है। रोसड़ा के महावीर चौक से लेकर रोसड़ा प्रखंड मुख्यालय तक जाने वाली मुख्य सड़क पिछले कई वर्षों से अत्यंत जर्जर हालत में है, जो अब स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता की जीती-जागती कहानी बयां कर रही है।

बारिश में टापू बन जाता है इलाका, आते हैं बाढ़ जैसे हालात
​इस सड़क की सबसे बड़ी और भयावह समस्या मानसून या हल्की बारिश के दौरान देखने को मिलती है। महावीर चौक से लेकर प्रखंड मुख्यालय तक की सड़क पूरी तरह जलमग्न हो जाती है। स्थिति इतनी बदतर हो जाती है कि मानो शहर के बीचों-बीच बाढ़ आ गई हो। इस गंदे और जमे हुए पानी के बीच से गुजरना स्थानीय लोगों और राहगीरों के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है।

रोजाना गिर रहे हैं बाइक और टोटो चालक, हादसे आम
​सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढे जलजमाव के कारण दिखाई नहीं देते, जिससे यह मार्ग ‘दुर्घटना जोन’ में तब्दील हो चुका है। आए दिन इस रास्ते से गुजरने वाले बाइक सवार और टोटो (ई-रिक्शा) असंतुलित होकर पलट रहे हैं। राहगीरों का पैदल चलना भी दूभर हो चुका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर वक्त किसी बड़ी अनहोनी का डर बना रहता है, लेकिन प्रशासन किसी बड़े हादसे के इंतजार में हाथ पर हाथ धरे बैठा है।

शहर की ‘नाक’ है यह सड़क, फिर भी अनदेखी क्यों l
​”यह केवल एक संपर्क मार्ग नहीं है, बल्कि यह सड़क रोसड़ा शहर की नाक है।”
​प्रखंड मुख्यालय, अंचल कार्यालय समेत कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्यालयों तक पहुँचने के लिए यही मुख्य रास्ता है। शहर की सबसे व्यस्त और चालू सड़कों में शुमार होने के बावजूद इस मार्ग की ऐसी दुर्दशा समझ से परे है। हर चुनाव में नेता आते हैं, इस सड़क को चमकाने का लॉलीपॉप थमाते हैं और वोट लेकर गायब हो जाते हैं।

जनता का तीखा सवाल- “आखिर कब बनेगी यह सड़क
​अब रोसड़ा की आम जनता के सब्र का बांध टूट रहा है। स्थानीय नागरिकों और व्यवसायियों ने शासन, प्रशासन और अपने जनप्रतिनिधियों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए एक ही तीखा सवाल पूछा है— “आखिर यह सड़क कब बनेगी” क्या रोसड़ा की जनता को टैक्स देने के बदले सिर्फ प्रशासनिक उपेक्षा और जलजमाव की त्रासदी ही मिलेगी।
​स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही इस जर्जर सड़क का जीर्णोद्धार और जल निकासी की व्यवस्था नहीं की गई, तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

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