


रोसड़ा (समस्तीपुर): रोसड़ा प्रखंड के भिरहा स्थित बाबू साहब मंदिर परिसर में आयोजित शिव महापुराण कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कथावाचक प्रकांड विद्वान पंडित रतिकांत झा ने भगवान शिव की महिमा का बखान करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया।
कथा व्यास पंडित रतिकांत झा ने बताया कि जो लोग व्यस्तता के कारण वर्ष भर नियमित पूजा-अर्चना नहीं कर पाते, यदि वे महाशिवरात्रि के दिन उपवास रखकर निष्ठापूर्वक बाबा भोलेनाथ की पूजा करें, तो उन्हें पूरे वर्ष की पूजा के बराबर पुण्य की प्राप्ति होती है।

शिव पंचाक्षरी मंत्र का महत्व
उन्होंने भगवान शिव के अति प्रभावशाली पंचाक्षरी मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जिन बच्चों का उपनयन संस्कार हो चुका है, उन्हें इस मंत्र का नित्य जाप करना चाहिए। जिनका उपनयन संस्कार नहीं हुआ है, वे ‘नमः शिवाय’ का जाप कर समान पुण्य के भागी बन सकते हैं। उन्होंने आगे बताया कि माघ (मग) महीने में शिव पूजन करने से अमोघ फल की प्राप्ति होती है।

कथा के दौरान देवों के बीच “श्रेष्ठ कौन?” विषय पर हुए विवाद के प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि जब देवताओं में वाक-युद्ध छिड़ गया, तब महादेव पाताल से लेकर आकाश तक एक विशाल ज्योतिर्लिंग (अग्नि स्तंभ) के रूप में प्रकट हुए। जब देवता उनका आदि और अंत खोजने में असमर्थ रहे, तब भगवान शिव ने संदेश दिया कि कोई छोटा या बड़ा नहीं है, सभी का सम्मान होना चाहिए। इसी दिन से देवताओं के बीच का विवाद समाप्त हुआ और भोलेनाथ ने भगवान विष्णु को सर्वश्रेष्ठ की उपाधि दी। उन्होंने कहा कि शिव ही आदि माता-पिता हैं और उन्हीं से संपूर्ण ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई है।



ॐ’ शब्द के उच्चारण मात्र से ही मनुष्य की सभी ज्ञानेंद्रियां जागृत हो जाती हैं।
स्थानीय लोगों में उत्साह और भाईचारे का संदेश
भीरहा गांव में पहली बार आयोजित हो रहे इस भव्य शिव महापुराण कथा के मुख्य यजमान एवं प्रायोजक कौशल किशोर उर्फ टुनटुन जी हैं। उन्होंने कहा, “इस कथा का मुख्य उद्देश्य जनकल्याण, समाज एवं राज्य की समृद्धि और लोगों में आपसी भाईचारा व प्रेम बनाए रखना है।”
कार्यक्रम में महिलाओं और पुरुषों की उपस्थिति बराबर की रही। दिन-प्रतिदिन श्रद्धालुओं की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में रंगा नजर आ रहा है।
रोसड़ा से विनय कुमार की रिपोर्ट




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