


रोसड़ा (समस्तीपुर):
नेपाल के ऐतिहासिक एवं पावन धाम जनकपुर से एक महंत अपनी पारंपरिक ऊँट की सवारी के साथ समस्तीपुर जिले के रोसड़ा प्रखंड अंतर्गत शाहपुर पहुँचे। गाँव में ऊँट के साथ साधु के आगमन की खबर फैलते ही स्थानीय लोगों और बच्चों की भारी भीड़ उन्हें देखने के लिए उमड़ पड़ी।

महंत जी गाँव-गाँव भ्रमण कर सनातन संस्कृति का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं और लोगों से मिलकर धार्मिक कार्यों एवं अपनी यात्रा के लिए सहयोग की मांग कर रहे हैं।
बचपन की यादें हुईं ताज़ा
डिजिटल क्रांति और आधुनिकता के इस दौर में ऊँट जैसी पारंपरिक सवारी का गाँव की गलियों में आना लोगों के लिए पुरानी स्मृतियों को जीवंत कर गया। बुजुर्गों और अधेड़ उम्र के लोगों ने बताया कि दशकों पहले जब यातायात के साधन सीमित थे, तब साधु-संत इसी तरह ऊँटों पर सवार होकर देश के कोने-कोने में यात्रा किया करते थे।

तस्वीर में साफ देखा जा सकता है कि ऊँट की पीठ पर बोरियाँ, बर्तन और यात्रा का सारा ज़रूरी सामान बँधा हुआ है। महंत जी भगवा वस्त्र धारण किए, माथे पर तिलक लगाए और हाथ में लाठी लिए एक दुकान के बाहर विश्राम करते नज़र आए।


महंत जी का संदेश: “आपसी सद्भाव और धर्म की रक्षा ही सर्वोपरि”
शाहपुर में ग्रामीणों से संवाद करते हुए महंत जी ने कहा:
”जनकपुर सीता मैया की पावन भूमि है। हमारी इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य लोगों के बीच धार्मिक चेतना जगाना, सनातन मूल्यों का संवर्धन करना और आपसी भाईचारे का संदेश देना है। समाज का सहयोग ही साधु-संतों की तपस्या और यात्रा का संबल बनता है।”


स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
शाहपुर के ग्रामीणों ने महंत जी का बड़ी आत्मीयता से स्वागत किया। लोगों ने अपनी-अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार अनाज, वस्त्र और दक्षिणा देकर सहयोग किया।


स्थानीय ग्रामीणों का कहना था:
“आजकाल मोबाइल और गाड़ियों के दौर में ऊँट को प्रत्यक्ष देखना एक दुर्लभ दृश्य बन गया है। बच्चों के लिए यह किसी अजूबे से कम नहीं था, वहीं हम बड़ों को अपने बचपन के वो दिन याद आ गए जब गाँव में साधु और ऊँट आते ही पूरा मोहल्ला खुशी से झूम उठता था।”
संस्कृति और परंपरा की झलक
यह दृश्य केवल सहयोग मांगने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने आधुनिकता के शोर में खोती जा रही भारतीय ग्रामीण संस्कृति, आतिथ्य सत्कार और बचपन की सादगी को एक बार फिर से जीवंत कर दिया।

![]()












Leave a Reply