वर्चुअल रैली के साथ चुनावी माहौल में तब्दील हुई बिहार।

ब्यूरो रिपोर्ट / पटना / संतोष राज ।
बिहार  में भाजपा के वर्चुअल  रैली  पर  सियासत गर्म ।भाजपा के माने तो उनके इन रैली में सोशल प्लेटफॉर्म के जरिए कई लाखों कार्यकर्ता तक अपना संदेश पहुंचाने का काम किया , हालांकि इस वर्चुअल रैली की तैयारी पूर्व से ही चल रही थी भाजपा द्वारा यह बिहार में चुनावी बिगुल का प्रथम वर्चुअल रैली  गृह राज्य मंत्री अमित शाह द्वारा की गई है।
हालांकि बीजेपी सरकार का इतिहास रहा कि सोशल मीडिया को ही हथियार बनाकर चुनावी जंग को जीतने में सफल रहे हैं।

दूसरी ओर बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के आवाहन पर पूरे बिहार में राजद के कार्यकर्ताओं ने थाली कटोरा पीटकर गरीब अधिकार दिवस मनाया है  हालांकि यह  दृश्य  नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव  के आवास पर भी देखने को मिला।
एक तरफ पूरे देश  कोविड 19 के इस महामारी से अब तक उबर नहीं पाया है ।इसी बीच बीजेपी द्वारा बिहार में चुनावी बिगुल फूंक दी गई है तो वहीं पर बिहार के तमाम राजनीतिक पार्टियों इन महामारी में अपनी अपनी बातों को लेकर सरकार पर निशाना साधने में लगे हैं।
 कई लाख बिहार के मजदूर अन्य राज्य  रोजी रोटी  कमाने के लिए गए थे। कोविड 19 को लेकर  मजबूरन उन्हें वापस बिहार आना पड़ा वैसे भी बिहार में मजदूरों के साथ – साथ कई लाख बेरोजगार लोग बैठे हुए हैं ।उनकी रोजगार के लिए सरकार या बिहार के राजनीतिक पार्टी कभी भी चर्चा नहीं करते हैं ।
शाम होते ही किसी भी टीवी चैनल पर  आकर अपनी डिबेट देना शुरू कर देते हैं सिर्फ सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते है लेकिन कभी भी रोजी रोटी कमाने वाले मजदूर या बिहार में बैठे बेरोजगार युवाओं पर सवाल नहीं उठाते हैं।

चुनावी वर्ष होने के कारण तमाम पार्टियां अपनी साख मजबूत करने में लगी है। कोरोना जैसे महामारी से गरीब असहाय तबके के लोग त्राहिमाम हैं सरकार के द्वारा चलाई गई कोई योजना धरातल पर नहीं पहुंच रहे ताकि लोगों को इसका लाभ मिल सके। पक्ष हो या फिर विपक्ष सभी राजनीतिक रोटियां सेकने में लगे। लाख डॉन के कारण करीब 3 महीने से बिहारी मजदूरों के सामने बेरोजगारी सबसे बड़ी समस्या है लेकिन सरकार द्वारा सिर्फ घोषणा की जा रही धरातल पर मनरेगा मजदूरों को भी रोजगार नहीं मिल रहा।

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