


रोसड़ा (समस्तीपुर)। समाज में बेटियों को लेकर बदलती सोच और सकारात्मकता की एक बेहद खूबसूरत तस्वीर रोसड़ा में देखने को मिली। यहाँ एक पिता ने अपनी पहली संतान के रूप में बेटी के आगमन को किसी उत्सव की तरह मनाया। पिता ने न केवल अपनी गाड़ी को फूलों से सजवाया, बल्कि पूरे गाजे-बाजे और सम्मान के साथ नवजात बच्ची और पत्नी को अस्पताल से घर लेकर गए।

बेटी के जन्म पर अस्पताल बना उत्सव का केंद्र
जानकारी के अनुसार, रोसड़ा प्रखंड के रहुआ निवासी सैयद मुर्शीद फैजाबाद के घर पहली संतान के रूप में बेटी ने जन्म लिया। बेटी के जन्म की खबर मिलते ही पिता की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने इस पल को यादगार बनाने के लिए अपनी गाड़ी को फूलों और गुब्बारों से सजवाया और रोसड़ा स्थित एक निजी अस्पताल पहुंचे।

अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद जब वे अपनी पत्नी और नवजात बेटी को सजी हुई गाड़ी में बैठाकर घर ले जाने लगे, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति इस भावुक और प्रेरक पल का गवाह बना।
”बेटी अल्लाह का तोहफा और घर की लक्ष्मी”
मीडिया से बात करते हुए पिता सैयद मुर्शीद फैजाबाद ने खुशी जाहिर करते हुए कहा:
”बेटी मेरे लिए अल्लाह का सबसे बड़ा तोहफा है। आज के दौर में बेटा और बेटी में कोई फर्क नहीं है। बेटी घर की लक्ष्मी होती है और मुझे अपनी बेटी के जन्म पर बहुत गर्व है।”


समाज में सराहना और सकारात्मक संदेश
सैयद मुर्शीद की इस अनूठी पहल की स्थानीय लोगों ने जमकर सराहना की है। लोगों का कहना है कि: यह पहल समाज में बेटियों के प्रति भेदभाव को खत्म करने में मील का पत्थर साबित होगी।
इससे यह संदेश जाता है कि बेटियां बोझ नहीं, बल्कि परिवार की शान होती हैं।
यदि हर परिवार इसी तरह बेटियों का स्वागत करे, तो समाज में लिंग-भेद पूरी तरह समाप्त हो सकता है।



यह वाकया न केवल रहुआ बल्कि पूरे रोसड़ा क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग इस पिता के जज्बे को सलाम कर रहे हैं।


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