


रोसड़ा प्रखंड अंतर्गत भिरहा पश्चिम पंचायत के किसानों को कृषि विभाग की कार्यप्रणाली के कारण भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्राकृतिक आपदा से फसल बर्बाद होने के बाद भी दर्जनों किसानों को कृषि इनपुट अनुदान से वंचित कर दिया गया है। विभागीय पोर्टल पर उन्हें “फसल अवशेष जलाने” के आरोप में निष्क्रिय दिखाया जा रहा है, जबकि किसानों का साफ कहना है कि उन्होंने खेत में अवशेष नहीं जलाया।किसानों के अनुसार, बीते दिनों आई तेज आंधी और बारिश ने खेतों में तैयार गेहूं और मक्का की फसल को पूरी तरह गिराकर बर्बाद कर दिया।

गिरी हुई फसल की कटाई के लिए मजदूर नहीं मिलने से स्थिति और विकट हो गई। किसी तरह किसानों ने मेहनत कर फसल को खेत से निकाला, लेकिन बारिश का पानी लगने से गेहूं काला पड़ गया, जिससे बाजार में उसकी मांग खत्म हो गई है।सरकार द्वारा फसल क्षति के बाद कृषि इनपुट अनुदान के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन जब किसान आवेदन करने पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि उनके नाम पोर्टल पर “फसल अवशेष जलाने” के कारण निष्क्रिय कर दिए गए हैं।

इससे वे आवेदन करने से वंचित रह गए।किसानों ने कहा कि उन्होंने अपने खेतों में फसल अवशेष नहीं जलाया है। उनका आरोप है कि सैटेलाइट सर्वे के आधार पर गलत तरीके से उन्हें दोषी मान लिया गया, जबकि जमीनी सच्चाई इससे अलग है।इस समस्या को लेकर किसान दुर्गा प्रसाद राय, छतनेश्वर प्रसाद राय, रत्नेश्वर प्रसाद राय, सुनैना देवी, गोपाल कुमार राय, हरिश्चंद्र राय, रघुवंश कुमार राय, दीपक कुमार राय, विनय कुमार राय, हरवंश कुमार राय, राम लखन राय, भूदेव राय, राममोहन राय, रामकिशोर राय, राजमणि, ओम प्रकाश राय, सुरेंद्र कुमार राय, साकेत बिहारी, श्रीराम राय, रामबाबू राय सहित अन्य ने हस्ताक्षर कर प्रखंड कृषि पदाधिकारी को आवेदन सौंपा है।




प्रखंड कृषि पदाधिकारी राज कुमार ने बताया कि सर्वे के दौरान सैटेलाइट से खेतों की तस्वीर ली गई थी, जिसके आधार पर संबंधित किसानों को निष्क्रिय किया गया है। उन्होंने कहा कि जिन किसानों को परेशानी है, वे आवेदन दें। आवेदन को वरीय अधिकारियों को भेजा जाएगा, ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके।




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