आस्था का महापर्व : बिथान के जगमोहरा त्रिवेणी संगम घाट पर चार दिवसीय कमला मेला शुरू, माघी पूर्णिमा पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

बिथान माघी पूर्णिमा के पावन अवसर पर बिथान प्रखंड स्थित जगमोहरा त्रिवेणी संगम घाट पर आस्था, विश्वास और श्रद्धा का अनुपम संगम देखने को मिला। कोसी, कमला और करेह नदियों के पवित्र संगम स्थल पर आयोजित चार दिवसीय कमला मेला के शुभारंम के साथ ही हजारों श्रद्धालुओं ने मोक्षवाहिनी मां कमला के पावन जल में आस्था पर सही स्नान की डुबकी लगाई। हर-हर मां कमला के जयघोष से पूरा संगम तट भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा।

माघी पूर्णिमा के दिन अहले सुबह से ही श्रद्धालुओं का जनसैलाब त्रिवेणी संगम घाट की ओर उमड़ पड़ा। पैदल यात्रियों के साथ-साथ निजी वाहनों से श्रद्धालु मेला स्थल पर पहुंचे और विधि-विधान से स्नान, पूजा-अर्चना कर पुण्य लाभ अर्जित किया। मान्यता है कि मां कमला के पावन जल में स्नान मात्र से सभी पापों का नाश होता है और सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य पूर्ण होती है।
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प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी जगमोहरा त्रिवेणी संगम कमला मेला में समस्तीपुर, दरभंगा, सहरसा, खगड़िया, बेगूसराय सहित आसपास के जिलों से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचे। संगम तट पर श्रद्धालुओं की अपार भीड़ और भक्तिमय माहौल देखते ही बन रहा था। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने मां कमला को चुनरी, फूल, नारियल अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की।
आस्था के इस महोत्सव के साथ-साथ मेला क्षेत्र में लोकजीवन की रंगीन छटा भी देखने को मिली। संगम तट पर विभिन्न प्रकार की दुकानें सजी हुई थी।

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बच्चों के मनोरंजन के लिए खिलौने की दुकान, मिठाई की दुकाने,टावर झूला, ब्रेक डांस, मौत का कुआं, ड्रैगन मनोरंजन रेलगाड़ी सहित कई झूले आकर्षण का केंद्र बने रहे। महिलाओं के लिए मीणा बाजार में रंग-बिरंगे कॉस्मेटिक और श्रृंगार सामग्री की दुकानें सजी थीं।मेले में लोहे से बने दैनिक उपयोग के हस्तनिर्मित औजार लोगों क़ो मन क़ो खूब भाते हैं, लकड़ी से निर्मित पलंग, सोफा, टेबल, कुर्सी और बेंच की दुकानों पर लोगों की खास भीड़ देखी गई। लकड़ी की पलंग 10 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक में उपलब्ध थी, जिसे लोग अन्य स्थानों की अपेक्षा यहां सस्ते और बेहतर मानकर जमकर खरीदारी करते नजर आए।

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श्रद्धालुओं का विश्वास है कि जो भक्त सच्ची श्रद्धा और आस्था के साथ मां कमला में स्नान कर पूजा-अर्चना करते हैं, उनकी मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होती है! विशेष रूप से कुमारी कन्याएं और निःसंतान महिलाएं मां कमला में विश्वास के साथ डुबकी लगाकर संतान सुख और मनचाही कामना की प्राप्ति करती है!मनोकामना पूर्ण होने पर श्रद्धालु मां कमला को चढ़ावे के रूप में जीवंत बकरी की पाठी, सोने-चांदी से निर्मित पाठी सहित अन्य वस्तुओं का दान-पुण्य करते हैं तथा तत्पश्चात मुंडन संस्कार भी कराया जाता है।मुंडन संस्कार के बाद ब्राह्मण क़ो भोजन करबाया जाता है, तथा ब्राह्मणों क़ो भोजन दक्षिणा के रूप में रूपये भी दान किये जाते हैं!

मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा का विशेष ध्यान मेला कमिटी की ओर से रखा गया है।वही मेला का शुभारंम स्थानीय विधायक राज कुमार राय ने विधिवत पूजा अर्चना के पच्यात फीता काटकर किया, मेला कमिटी के सदस्यों ने मिथिला परम परमपरा नुसार विधायक श्री राय क़ो पुष्पा माला, पुष्प गुच्छ,अंग वस्त्र देकर स्वागत किया,मेला अध्यक्ष दीपक कुमार दिनकर, अविनाश कुमार उर्फ़ गौरी शंकर, सोनू कुमार, मोनू कुमार,नवनीत कुमार नवीन, पूर्व पंसस नवलकिशोर निराला, समाज सेवी अरबिंद कुमार पटेल, भगीरथ डीलर राजेश कुमार रौशन एवं मेला कमेटी के सदस्यों द्वारा पूरे आयोजन की निगरानी की जा रही थी।

वहीं विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अंचल अधिकारी रूबी कुमारी, अंचल राजस्व अधिकारी अभिषेक कुमार, थानाध्यक्ष प्रकाश चंद्र राजू, पीएसआई शेखर सुमन, पीएसआई सन्नी कुमार सहित पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात रहा।कुल मिलाकर जगमोहरा त्रिवेणी संगम घाट पर आयोजित कमला मेला आस्था, विश्वास, परंपरा और लोकसंस्कृति का जीवंत उदाहरण बना हुआ है, जहां श्रद्धालु मां कमला के चरणों में शीश नवाकर आध्यात्मिक शांति और पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं!मौके पर बिथान जदयू प्रखंड अध्यक्ष कैलाश राय, हसनपुर जदयू प्रखंड अध्यक्ष संजीव कुशवाहा,जदयू वरिष्ठ नेता शिवशंकर यादव, बिजय यादव समेत कई अन्य गण मान लोग उपस्थित थे!

 

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